Sunday, July 1, 2012

Fwd: झारखण्ड के गिरीडिह जिला मे विधायक ने गर्भवती को पीटा, गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के सन्दर्भ मे !



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From: Detention Watch <pvchr.adv@gmail.com>
Date: 2012/6/28
Subject: झारखण्ड के गिरीडिह जिला मे विधायक ने गर्भवती को पीटा, गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के सन्दर्भ मे !
To: ncw@nic.in, complaintcell-ncw@nic.in
Cc: lenin@pvchr.asia, Lenin Raghuvanshi <pvchr.india@gmail.com>


                                                                                                                     दिनांक - 28 जून, 2012.
सेवा मे,
           श्रीमान अध्यक्षा महोदया,
           राष्ट्रीय महिला आयोग,
           नई दिल्ली - भारत !
 
विषय :- झारखण्ड के गिरीडिह जिला मे विधायक ने गर्भवती को पीटा, गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के सन्दर्भ मे !

महोदया,

      विषयक के सन्दर्भ मे आपका ध्यान आकृष्ट कराना चन्हुंगा,  जमीन पर जबरन कब्जा करने को लेकर झारखण्ड के गिरीडिह जिला के जमुआ विधायक चंद्रिका महथा ने अपने भाई व अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर पड़ोस की एक महिला तारा देवी - 27 वर्ष की जमकर पिटाई की है। पिटाई से महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। वहीं महिला को किसी तरह बचाया जा सका है। मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। इस संबंध में इलाजरत तारा देवी (27) ने पुलिस से लिखित शिकायत की है।
घटना यह हुई की देर रात अचानक जमुआ विधायक चंद्रिका महथा, उसके भाई अयोध्या महथा, नरेश महथा, बासुदेव महथा, सुमित्रा देवी, मसोमात प्रेमा देवी सहित कई लोग उसके घर पहुंचे और उसके पति मनोज महथा को खोजने लगे। साथ ही जमीन छोड़ने की धमकी देने गए। पति के न मिलने पर विधायक और उनके रिश्तेदारों ने उन्हें ही पीटना शुरू कर दिया। तारा देवी को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां आनन-फानन में गर्भ से बच्चे को निकाला गया।
  

विधायक बनने के बाद सम्भावित दोषी ने पीडिता के पति को फर्जी मुकदमा मे भी फसाए है, जमीन को लेकर कई वर्षो से झगडा चल रही थी.     

          अतः आप से अनुरोध है कि कृपया इस मामले को संज्ञान मे लेते हुये इस पर त्वरित कार्यवाही का आदेश दे तथा मुआवजा के साथ मामले के पीडित परिजन को और गवाहो को सुरक्षा के साथ सम्भावित दोषियो पर कानूनी कार्यवाही की जाए !

 

भवदीय
 
डा0 लेनिन,
(महासचिव)
 
मानवाधिकार जननिगरानी समिति,
सा 4/ 2 ए. दौलतपुर, वाराणसी - 221002
 
मो. - +91-9935599333.
ई - मेल - lenin@pvchr.asia,
 
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संलगनक : - http://www.bhaskar.com/article/JHA-RAN-mla-mahtha-beaten-the-pregnant-unborn-childs-death-3456025.html

विधायक महथा ने गर्भवती को पीटा, गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत

गिरिडीह। जमीन पर जबरन कब्जा करने को लेकर जमुआ विधायक चंद्रिका महथा ने अपने भाई व अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर पड़ोस की एक महिला की जमकर पिटाई की है। पिटाई से महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। वहीं महिला को किसी तरह बचाया जा सका है। मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। इस संबंध में इलाजरत तारा देवी (27) ने पुलिस से लिखित शिकायत की है।

तारा देवी का कहना है कि मंगलवार की देर रात अचानक जमुआ विधायक चंद्रिका महथा, उसके भाई अयोध्या महथा, नरेश महथा, बासुदेव महथा, सुमित्रा देवी, मसोमात प्रेमा देवी सहित कई लोग उसके घर पहुंचे और उसके पति मनोज महथा को खोजने लगे। साथ ही जमीन छोड़ने की धमकी देने गए। पति के न मिलने पर विधायक और उनके रिश्तेदारों ने उन्हें ही पीटना शुरू कर दिया। तारा देवी को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां आनन-फानन में गर्भ से बच्चे को निकाला गया।

 

 










 
 




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Upendra Kumar
Manager Model Block,
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Sa 4/2A, Daulatpur, Varanasi,
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Mob:- +91-9335648060, +91-9935599338
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Fwd: Most urgent : उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के दुद्धी ब्लाक के जोरकहू गांव की 55 साला भगिया को डायन घोषित कर गांव से बाहर जाने को कह दिये जाने के सन्दर्भ मे !



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From: Detention Watch <pvchr.adv@gmail.com>
Date: 2012/6/5
Subject: Most urgent : उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के दुद्धी ब्लाक के जोरकहू गांव की 55 साला भगिया को डायन घोषित कर गांव से बाहर जाने को कह दिये जाने के सन्दर्भ मे !
To: ncw@nic.in, complaintcell-ncw@nic.in
Cc: lenin@pvchr.asia


                                                                                                                   दिनांक - 05 जून, 2012.
सेवा मे,
           अध्यक्षया महोदया,
           राष्ट्रीय महिला आयोग,
           नई दिल्ली - भारत !
 
विषय : उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के दुद्धी ब्लाक के जोरकहू गांव की 55 साला भगिया को डायन घोषित कर गांव से बाहर जाने को कह दिये जाने के सन्दर्भ मे !

महोदया,

      विषयक के सन्दर्भ मे आपका ध्यान आकृष्ट कराना चन्हुंगा, जहा के एक वृद्ध महिला को डायन कह कर उत्पीडन किया जा रहा है, वहा के जनप्रतिनिधि यानि विधायक से प्रधान तक इस मामले मे अगम्भीर हो कर अपना पल्ला झाड. रहे है, और खबर छपने तक किसी भी स्थानीय प्रशासन द्वारा मामले मे हस्तक्षेप नही की गयी है, स्थानीय पुलिस भी मामले से अभी तक अनभिज्ञता जाहिर कर रही है, जो की महिलाओ के अस्मिता को संरक्षण को लेकर दुखद है. आज भी आधी आबादी की मानवाधिकार हनन की मामला इसी कु - प्रथा के कारण मानवता शर्मशार है. 

       

      इस मामले मे अभी भी महिला को डायन कह कर गांव से बाहर करने के लिए उत्पीडन किया जा रहा है !

 

      महोदया आज भी आधी आबादी की मानवाधिकार हनन की मामला इसी कु - प्रथा के कारण मानवता शर्मशार है, इसलिए मामले मे पीडित महिला और उसके परिवार को त्वरित सुरक्षा और सम्मान हेतु व्यवस्था की जाए !

      

      अतः आप से अनुरोध है कि कृपया इस मामले को संज्ञान मे लेते हुये इस पर त्वरित कार्यवाही का आदेश दे ताकि समाज मे फैली कु - प्रथा के तोडते हुए न्याय की व्यवस्था लागू हो और सम्मानपूर्ण जीवन के जीने की व्यवस्था बने तथा मुआवजा के साथ मामले के पीडित परिजन के साथ गवाहो को सुरक्षा के साथ सम्भावित दोषियो पर कानूनी कार्यवाही की जाए !

 

  संलगंक : -

http://epaper.amarujala.com/svww_zoomart.php?Artname=20120605a_001190003&ileft=-5&itop=1248&zoomRatio=136&AN=20120605a_001190003

'विधायक जी अबहीं भूत नहिनी उतरल'

मनोज श्रीवास्तव

लखनऊ। सोनभद्र के नक्सल प्रभावित दुद्धी ब्लाक के जोरकहू गांव की 55 साला भगिया को डायन घोषित कर गांव से बाहर जाने को कह दिया गया है। उसे एक दर्जन लोगों सहित तमाम जानवरों की मौत का दोषी भी बताया गया है। भगिया के दोनों बेटे बूढ़ी मां को घर से निकालने को तैयार नहीं है।

मामला पहले पुलिस फिर स्थानीय विधायक रूबी प्रसाद की चौखट पर पहुंचा। भगिया को किसी ओझा के पास ले जाकर भूत उतरवाने की सलाह देकर विधायक ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की। विधायक की सलाह पर उसे देवास (जहां ओझा भूत झाड़ता है) में एक हफ्ता बिताने के लिए भेजा गया। पर गांव वालों का कहना है कि भगिया का भूत नहीं उतरा है, अभी भी शरापती (श्राप) रहती है, वे उसे गांव से बदर करने पर उतारू हैं। टकराव की स्थिति बन रही है। परेशान गांव वाले, जिनमें आदिवासियों की संख्या अधिक है, सत्र में भाग लेने लखनऊ आईं विधायक को फोन करके कहते हैं कि 'विधायक जी कुछ करऽ, अबहीं भूत नहिनी उतरल।'

जोरकहू गांव में पिछले एक साल के दौरान जानवरों व मनुष्यों की मौत की कुछ घटनाएं हुईं। गांव वालों का माथा ठनका और घटनाओं की वजह भूत-प्रेत का प्रकोप मान लिया गया और शक भगिया पर किया।

शेष पेज 16 पर

गांव वाले दर्जन भर लोगों और जानवरों की मौत का जिम्मेदार मानते हैं भगिया को

ऐसी घटनाएं जब-तब इस आदिवासी बहुल पिछड़े इलाके में होती रहती हैं। विधानसभा में मुद्दा उठाकर सरकार की ध्यान इस पिछड़ेपन की तरफ खींचने की कोशिश करूंगी

-रूबी प्रसाद. विधायक दुद्धी

भगिया की वजह से गांव को बहुत नुकसान हो चुका है। गांव की बेहतरी के लिए आवश्यक है कि वह अब बाहर चली जाए। वरना गांव को और बड़ी विपदाओं का सामना करना पड़ेगा।

-चंद्रिका प्रसाद, निवासी, जोरकहू

निजी तौर पर मैं भूत-प्रेत जैसी किसी चीज पर विश्वास नहीं करता। पर आदिवासी बहुल गांव में लू लगने या पेट खराब होने पर भी लोग पहली उंगली भूत व जादू टोटकों की तरफ उठाते हैं।

-राजकुमार सिंह, प्रधान, जोरकहू

भगिया

 

प्रथम पेज के शेष

 

विधायक जी...

शक पुख्ता करने के लिए गांव के लोग 17 अप्रैल को जिले की सीमा से लगे झारखंड के सिंघी ताली (देवास) गांव गए, जहां ओझा लोग भूत प्रेत उतारने का काम करते हैं। वहीं एक ओझा ने बताया कि भगिया नामक औरत पर भूत-प्रेत आते हैं और उसी की वजह से गांव में असामयिक मौतें हो रही हैं, आगे और विपदाएं आ सकतीं हैं। बस भगिया आ गई निशाने पर। गांव के 9 परिवारों को भगिया के प्रकोप का शिकार बताया गया। गांव वालों ने उसके बेटों से भूत उतरवाने को कहा। बेटों ने पहले तो हामी भर दी पर बाद में कहने लगे कि वे गांव छोड़कर नहीं जाएंगे। मां को भी नहीं छोड़ूेंगे। इस पर गांव वालों ने पहले पुलिस से फरियाद की। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाया, पर मारपीट के भय से लोग पुलिस के पास नहीं गए। मामला विधायक के पास पहुंचा। गांव वालों ने बाकायदा भगिया मामले की लिखित शिकायत विधायक से की। विधायक ने दोनों पक्षों की उपस्थिति में तीन घंटे पंचायत कराई। बकौल विधायक, पंचायत में भगिया से जब उस पर लगे इल्जामों के बारे में पूछा गया तो उसने बड़े ही कातर भाव से कहा कि 'कहां कऽ भूत, कहां कऽ परेत, हियां तऽ पेट पै लाला पड़ल बाऽ।' पर पंचायत में उसके बेटों के अलावा कोई व्यक्ति उसकी सफाई पर कान देने को तैयार नहीं था। विधायक ने भी पहले भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती है, कहकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की पर खासतौर से आदिवासी इस तरह की बात सुनने तक को तैयार नहीं थे। माहौल देख विधायक ने भी दबाव नहीं बनाया और कहा कि भगिया देवास (सोनभद्र की सीमा से लगा झारखंड का सिंधीताली गांव जहां ओझा भूत-प्रेत झाड़ते हैं) जाकर भूत उतरवा ले। भगिया देवास से होकर आई है। पर गांव वाले कह रहे हैं कि उसका भूत नहीं उतरा है। साथ ही विधायक पर दबाव बना रहे हैं कि वह समस्या का निराकरण करवाएं, अन्यथा उनके गांव में विपदाओं का दौर जारी रहेगा। विधायक खुद को धर्मसंकट में महसूस कर रही हैं। एक तरफ भगिया की कातर भाव से देखती आंखे हैं तो दूसरी तरफ बाहरी दुनिया से काफी कुछ अनजान और अंधविश्वास में जकड़ा आदिवासी समाज। गांव वाले धमकी भरे सुर में बोल रहे हैं कि अगर भगिया जल्द ही गांव से बेदखल न हुई तो वे पंचायत के जरिए कोई निर्णायक कदम उठाएंगे।

http://epaper.amarujala.com/svww_zoomart.php?Artname=20120605a_016190009&ileft=606&itop=753&zoomRatio=201&AN=20120605a_016190009

भवदीय
 
डा0 लेनिन,
(महासचिव)
 
मानवाधिकार जननिगरानी समिति,
सा 4/ 2 ए. दौलतपुर, वाराणसी - 221002
 
मो. - +91-9935599333.
ई - मेल - lenin@pvchr.asia,
 
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Upendra Kumar
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Sa 4/2A, Daulatpur, Varanasi,
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Fwd: Most urgent :- वाराणसी जिले के थाना आदमपुर पुलिस के द्वारा माफिया के ना मिलने पर उसके भाई को गिरफ्तार करने के सम्बन्ध मे।



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From: Detention Watch <pvchr.adv@gmail.com>
Date: 2012/6/3
Subject: Most urgent :- वाराणसी जिले के थाना आदमपुर पुलिस के द्वारा माफिया के ना मिलने पर उसके भाई को गिरफ्तार करने के सम्बन्ध मे।
To: Anil Kumar Parashar <jrlawnhrc@hub.nic.in>, akpnhrc@yahoo.com
Cc: lenin@pvchr.asia, Lenin Raghuvanshi <pvchr.india@gmail.com>, shruti@pvchr.asia



                                                                                                                     दिनांक - 03 जून, 2012.
सेवा मे,
           श्रीमान अध्यक्ष महोदय,
           राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग,
           नई दिल्ली - भारत !
 
विषय : उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले मे थाना आदमपुर पुलिस के द्वारा माफिया के ना मिलने पर उसके भाई को गिरफ्तार करने के सम्बन्ध मे।

महोदय,

आपको यह अवगत कराना चाहता हू कि वाराणसी जिले के आदमपुर थाना की पुलिस ने एक माफिया को पकडने के लिये दबिश दी लेकिन वह माफिया के ना मिलने पर पुलिस वाले ने उसके छोटे भाई छोटू को उसके घर से उठा ले गयी और पिछले 3 दिनो से उसे थाने मे बैठाई हुयी है तथा किसी से मिलने नही दे रहे है. किसी भी अनहोनी घटना होने की आशंका है।

      अतः आप से अनुरोध है कि कृपया इस मामले को संज्ञान मे लेते हुये इस पर त्वरित कार्यवाही का आदेश दे ताकि एक निर्दोष के मानवाधिकार का संरक्षण हो सके और गिरफ्तारी, हिरासत और पूछ्ताछ के सन्दर्भ मे डी.के. बसु बनाम प. बंगाल के निर्देशो को धज्जिया उडाने वाले दोषी थाना पर कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करे !

 

  

भवदीय
 
डा0 लेनिन,
(महासचिव)
 
मानवाधिकार जननिगरानी समिति,
सा 4/ 2 ए. दौलतपुर, वाराणसी - 221002
 
मो. - +91-9935599333.
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Fwd: NHRC-RCT



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From: Detention Watch <pvchr.adv@gmail.com>
Date: Sun, Jun 3, 2012 at 8:39 PM
Subject: Fwd: NHRC-RCT
To: pvchr.adv.india@blogger.com





Case Details of File Number: 11077/24/72/2010-BL

Diary Number 32940
Name of the Complainant LENIN RAGHUVANSHI, BAMS MEMBER
Address DISTRICT VIGILANCE COMMITTEE, ON BONDED LABOUR, SA 4/2A, DAULATPUR,
VARANASI , UTTAR PRADESH
Name of the Victim VINOD MUSAHAR S/O VISHWANATH MUSHAR & OTHERS
Address R/O VILL- JAMUAI, PO- LAHUAN, PS- DEOGAON,
AZAMGARH , UTTAR PRADESH
Place of Incident 'R' MARKA BRICKS KILN, KASHIPU
VARANASI , UTTAR PRADESH
Date of Incident 3/11/2010
Direction issued by the Commission These proceedings shall be read in continuation of the earlier proceedings of the Commission dated 5.10.2011. On 5.10.2011 the Commission observed and ordered: Let a copy of the complaint filed by Sh. Lenin Raghuvanshi along with the affidavit be sent to the District Magistrate, Varanasi with the direction to cause an enquiry by an officer subordinate to him under the Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976and submit report within six weeks. Pursuant to the directions of the Commission a letter was issued to District Magistrate, Varanasi on 14.10.2011 but no report submitted. Let a final reminder be issued to District Magistrate, Varanasi to submit report within six weeks failing which Commission shall be compelled to initiate proceedings under Section 13 of the Protection of Human Rights Act 1993.
Action Taken Additional Information Called for (Dated 3/20/2012 )
Status on 6/2/2012 Response from concerned authority is awaited.

 

Case Details of File Number: 9808/24/72/2010

Diary Number 29161
Name of the Complainant LENIN RAGHUVANSHI, B.A.M.S. MEMBER
Address DISTRICT VIGILANCE COMMITTEE ON BONDED LABOUR, SA 4/2A, DAULATPUR,
VARANASI , UTTAR PRADESH
Name of the Victim PARVATI W/O LAKSHMAN MUSHAR & OTHERS
Address AS ABOVE
VARANASI , UTTAR PRADESH
Place of Incident LABH MARKA BRICK KILN,LAKSHIRA
VARANASI , UTTAR PRADESH
Date of Incident 1/1/1991
Direction issued by the Commission The grievances raised in this complaint relate to the matter, which is a subject of the State. Let the complaint be transferred to the Uttar Pradesh State Human Rights Commission u/s 13 (6) of the Protection of Human Rights Act, 1993, as amended by the Protection of Human Rights (Amendment) Act, 2006, for disposal in accordance with the provisions of the Act. 2. In the meantime, notice be issued to the concerned SP/SSPs,requiring him to conduct inquiry and submit report as the allegations contained in the complaint appear to be serious in nature. The report should positively be submitted to the Uttar Pradesh State Human Rights Commission within four weeks.



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Upendra Kumar
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Fwd: उत्तर प्रदेश के बदायू जनपद के लालपुर पुलिस चौकी मे 17 वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार के सन्दर्भ मे !



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From: Detention Watch <pvchr.adv@gmail.com>
Date: 2012/5/29
Subject: उत्तर प्रदेश के बदायू जनपद के लालपुर पुलिस चौकी मे 17 वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार के सन्दर्भ मे !
To: complaintcell-ncw@nic.in, ncw@nic.in
Cc: lenin@pvchr.asia, Lenin Raghuvanshi <pvchr.india@gmail.com>


                                                                                                                     दिनांक - 29 मई, 2012.
सेवा मे,
           श्रीमान अध्यक्षा महोदया,
           राष्ट्रीय महिला आयोग,
           नई दिल्ली - भारत !
 
विषय -  उत्तर प्रदेश के  बदायू जनपद के लालपुर पुलिस चौकी मे 17 वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार के सन्दर्भ मे !
 
महोदया,
         हम आपका ध्यान उत्तर प्रदेश के  बदायू जनपद के लालपुर पुलिस चौकी की ओर आकृष्ट कराना चन्हुंगा, जहा 17 वर्षीय किशोरी के साथ पुलिस के मुखबिर व वहा उपस्थित सिपाही का दोस्त ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला  और वही  सिपाही घटना के वक्त पुलिस चौकी के गेट पर खडा होकर पहरा देता रहा ! 
 
         पीडिता किशोरी रामपुर जिले के खजुरिया थाना अंतर्गत गांव कायमगंज  की निवासनी है, जो बडे सरकार की दरगाह पर जियारत करने आयी थी ! रात होने पर वह अपने वृद्ध रिश्तेदार के साथ एक तख्ते पर सो गयी, उसी दौरान सम्बन्धित पुलिस चौकी के गश्ती करते सिपाही गण पहुंच गये और चौकी ले आये ! पुलिस किशोरी और रिश्तेदार के छोडने के एवज मे 20 हज़ार रूपय्रे की मांग भी रखा था !
 
 
 
           विदित हो की जिन लोंगो पर जाय्ररीन की सुरक्षा का जिम्मा था, वे ही समाज मे असुरक्षा और अवयवस्था को जन्म देते है ! इस तरह की मामला हमेशा सुनने और देखने को मिलती है !
 
           अत: आप से अनुरोध है की मामले मे त्वरित हस्तक्षेप करते हुए सम्भावित दोषियो के खिलाफ न्यायोचित कानूनी कार्यवाही की जाए, एवम पीडिता व गवाहो को सुरक्षा तथा मुआवजा  प्रदान कराने का आदेश पारित करने के साथ मामले मे उच्चस्तरीय जांच कराने की कृपा करे !  
 
भवदीय
 
डा0 लेनिन,
(महासचिव)
 
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बदायूं : उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में शर्मसार कर देने वाली घटना में पुलिस चौकी में एक नाबालिग लड़की से कथित रूप से बलात्कार किया गया। इस मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलम्बित करके गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस अधीक्षक रतन कुमार श्रीवास्तव ने आज यहां बताया कि रामपुर की रहने वाली 17 वर्षीय लड़की कल अपने नाना इकराम अली के साथ 'बड़े सरकार' की मजार पर चादर चढ़ाने आयी थी। रात ज्यादा हो जाने पर वह मजार परिसर में ही ठहर गए। उन्होंने बताया कि इसी बीच वहां शहर कोतवाली अंतर्गत लालपुल पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने इकराम अली और उसकी नातिन को कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में देखा और दोनों को चौकी परिसर में ले गये। बाद में वे पुलिसकर्मी गश्त पर चले गए।

श्रीवास्तव ने बताया कि रात करीब तीन बजे सुमित नामक पुलिस रंगरूट अपने साथी गोपाल के साथ आया और रिहाई के लिये अली से कथित रूप से धन मांगा जिसमें असमर्थता जताने पर गोपाल उस लड़की को पुलिस चौकी के अंदर बने कमरे में ले गया और सुमित बाहर से दरवाजे की कुंडी लगाकर पहरे पर बैठ गया। उन्होंने बताया कि कमरे में लड़की के चीखने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद स्थानीय लोग पहुंच गये और गोपाल तथा सुमित को पकड़ लिया।

श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में सुमित, पुलिस चौकी में तैनात सिपाहियों औसाफ अली और माजिद तथा बलात्कार के आरोपी गोपाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया सुमित, औसाफ अली और माजिद को निलम्बित कर दिया गया है। श्रीवास्तव ने बताया कि पीड़ित लड़की को चिकित्सीय परीक्षण के लिये भेजा गया है। (एजेंसी)
 
बदायूं की पुलिस चौकी में किशोरी से रेप
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। रामपुर के एक गांव से आई एक किशोरी के साथ रविवार की रात लालपुल की पुलिस चौकी में एक युवक ने बलात्कार किया। युवक सिपाही का दोस्त बताया गया है। युवती बड़े सरकार की दरगाह पर जियारत करने आई थी। हादसे की खबर लगते ही लोग जुट गए और रात ही में पुलिस चौकी घेर ली। हंगामा सोमवार सुबह तक चलता रहा। एसपी के आदेश पर दो सिपाहियों और एक रंगरूट को निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने तीनों के साथ ही रेप के आरोपी युवक को भी गिरफ्तार कर चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
हादसे का शिकार किशोरी अपने रिश्ते के नाना (मां के खालू) के साथ रामपुर के एक गांव से यहां आई थी। रविवार रात उसके रिश्ते के नाना और किशोरी बड़े सरकार की दरगाह परिसर में एक ही तख्त पर सोए थे। वहां दूसरे जायरीनों को दोनों को साथ सोने पर कुछ संदेह हुआ तो उन्होंने शोर मचा दिया। इसी दौरान पुलिस चौकी के गश्ती सिपाही माजिद हुसैन, औसाफ अली एवं सुमित के अलावा उसका दोस्त गोपाल निवासी मोहल्ला ब्राह्मपुर वहां पहुंच गए। सिपाही दोनों को चौकी ले आए। आरोप है कि पुलिस ने किशोरी और उसके रिश्तेदार को छोड़ने के लिए 20 हजार रुपये मांगे। रुपये नहीं देने पर दोनों को चौकी में बैठाए रखा गया।
सिपाही माजिद और औसाफ रात करीब 12 बजे फिर गश्त पर चले गए। इसी दौरान रंगरूट सुमित की मौजूदगी में उसके दोस्त गोपाल ने चौकी के ही कमरे में किशोरी के साथ बलात्कार किया। सोमवार को सुबह 11 बजे लालपुल पुलिस चौकी के सामने भीड़ ने रास्ता जाम कर दिया। एसपी रतन श्रीवास्तव के आदेश पर पीड़ित किशोरी की तहरीर पर सदर कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया।











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Thursday, June 28, 2012

26 जून अंतर्राष्ट्रीय यातना विरोधी दिवस - एक प्रस्तुतीकरण (पुरुषवादी समाज उनके कामों को काम नहीं मानता, उनके कामों के लिए मेहनताना का भी रिवाज नहीं है. तब पुरुषों को लगता है कि वे महिलाओं का भरण पोषण कर रहे हैं. )

पुरुषवादी समाज उनके कामों को काम नहीं मानता, उनके कामों के लिए मेहनताना  का भी रिवाज नहीं है. तब पुरुषों को लगता है कि वे महिलाओं का भरण पोषण कर रहे हैं.  

किसी को शारीरिक या मानसिक कष्ट देना ही यातना है. सभ्यता के इस दौर में जब सभी अपने स्वार्थों के वशीभूत हैं, अपने लाभ के लिए सामने वाले के हित अनहित का विचार त्याग चुके हैं तो निश्चित ही एक ऐसी संवेदन हीनता जन्म लेगी  जिसमें लोग दुसरे को कष्ट पहुंचाने को कुछ बुरा नहीं मानेंगे. समय के इस दौर का मतलाब कदापि नहीं है कि हमारा इतिहास यात्नास्पद व्यवहारों से शुन्य रहा हो.. यातना का एक लम्बा इतिहास रहा है . जो कमजोर रहे हैं वे यातना को सहने के लिए आदि काल से ही अभिशप्त रहे हैं. किन्तु अपने लाभ-लोभ के लिए अपने ही भाई बंधुओं को कष्ट देना मनुष्यता नहीं है. मनुष्य है वही जो मनुष्य के लिए मरे ,- जबकि यातना का इतिहास बतलाता है कि मनुष्य दूसरों के लिए मरेगा क्या अपने के लिए दूसरों को मारने में उद्धत है.
यातना शोषकों का हथियार रहा है . वह इसके द्वारा जहाँ शोषितों को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करते हैं वहीँ अपनी आक्रामक सत्ता का नंगा नाच भी दिखाते है . यातना वही सहते हैं जो किसी ना किसी रूप से मजबूर और विवश हैं, उनकी विवशता उन्हें चुप रहने को मजबूर करती है तो उनकी चुप्पी शोषकों के इरादों और हौसलों को मजबूत बनाती है.. किसी भी समाज में यातना का जुल्म महिलाओं और बच्चों पर अधिक चलता है.. महिलायें घरेलू परिवेश में पुरुषों पर निर्भर रहकर उनके जोरो  जुल्म को झेलती हैं. यद्यपि वे घर में लगातार कामों में जुटी रहती हैं ,किन्तु पुरुषवादी समाज उनके कामों को काम नहीं मानता, उनके कामों के लिए मेहनताना  का भी रिवाज नहीं है. तब पुरुषों को लगता है कि वे महिलाओं का भरण पोषण कार रहे हैं. यह पुरुषवादी अहं नारियों को निचा समझता है और उन्हें यातना का भागी बनाने में नहीं झिझकता, इसके अलावा कई ऐसे रीति-रिवाज औए व्यवस्था के घिनौने रूप हैं जिसके कारण महिलायें यातना का शिकार बनती है. इसी तरह बच्चे भी यातना का शिकार बनते हैं. बाल- मजदूरी के अभिशप्त बच्चे तो इसमें शामिल हैं ही , अच्छे भले घर के बच्चे भी किसी न किसी रूप में शारीरिक अथवा मानसिक यातना को झेलते हैं. जिन घरों में पति पत्नी के बीच तनाव रहता है उस घर के छोटे बच्चे भी उस तनाव को महसूस करते हैं, यह तनाव उनके विकास शील व्यक्तित्व को तोड़ने  का काम करता है.
यह जरुरी है कि यातना का विरोध किया जाए. यह भी निश्चित है कि यातना कोई सहता नहीं उसकी मजबूरी उसे सहमे को विवश करती है.  मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है . समाज का काम सुरक्षा देना ही है.. हम सामाजिक तभी कहला सकते हैं जब सभी की सुरक्षा को महत्त्व दें..इस लिहाज से सभी का यह कर्तव्य है कि यातना और शोषण मुक्त समाज के निर्माण में अपना सहयोग दें..
लेख - अस्मुरारी नन्दन मिश्रा
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Thursday, June 7, 2012

How testimony useful for human being


The outcomes of testimony create compassion & warmth in personality among community. Today, all class, caste & religious people presents their hitch with emotion through testimony and wants justice.

Now a day every communities wants their rights and to re – establish it fully by help of testimony.

In society many people works mainly in development sector, by seeing I can say that dalit & minority people should grow but they cannot be done by getting rights. They may think that by economical empowerment they get civil rights but the present situation of our country it cannot be happen anymore.

There is silence in every expression; it indicates how inhabitants are panic. Silence takes place because of scariness.

“Scariness is the mother of silence, lacking of awareness & consciousness about rights, civil rights is similar to soul without body. It is as similar as like urgency is the mother of corruption. Without patience, self organize harmony & group initiation, corruption cannot be bunged.