जब मै कक्षा 3 या 4 मे था, उस दौरान छात्रावास मे रह कर अपने दो भाई आलोक व रूपेश के साथ रहता था. उसी दरमियान एक लगभग 18 वर्ष के उम्र के मेधावी युवक स्कूल मे शिक्षक की नौकरी के लिए आये, उन्हे पढाने तथा शारीरिक विकास मे योगदान हेतु कुश्ती, खेल की जिम्मा सौपा गया. वे खुद कुश्ती के शौकिना थे.
अपना परिचय देते वक्त उन्होने एक फते की बात क...
मुझे भी यह व्यवहार अच्छा नही लगा, वे अभी बोलते की यू आर डिस्मिट, उससे पहले अपना पद छोड वहा से निकल गया !
अब आप सभी बताओ क्या एक इंजिनियर मार्केट मे बेचने वाली स्पीच कैसे दे, सम्भव था की मै खिचता लेकिन मुझे यह गवारा नही लगा ! एक तरफ 20 हज़ार की नौकरी, दुसरी तरफ मा - पिता की आशा! अखिर मे मुझे परिवार को निराश करना पडा ! दुखी मै अत्यधिक था, लेकिन अंतरात्मा से खुश !
निराश परिवार ने भी मुझसे बोलना छोड दिया, सो मै अपने रिश्तेदार के यहा अपनी मनपसन्द का काम खेती और बच्चो को पढाई के लिए सोचा और आगे उचित सम्भावना हेतु प्रतिक्षा !
घर जा नही सकता हु क्योकि परिवार का कहना है की " खेती करोगे, भैस चराओगे, यह हम सह नही सकते, इतना क्यो पढाया तुम्हे, नाक कटाने के लिए !
मै यहा खुश हू, खेती मे भी हाथ है, भैस पर भी ध्यान है तथा पढाई भी चल रही है !
अब आप लोग बताओ इसमे मेरा क्या गलती !
हम सभी बोले - सही है सर !
सर जी शिक्षक के साथ हमलोंगो का दोस्त भी थे, कुश्ती लडना, शारीरिक मेहनत वाला खेल खेलना उस समय रूचिकर हो गया था !
उनका नेचर के बारे मे मै बस यही कहुंगा की किसी अनुचित को न सहने वाला, हम बच्चो की हर बात को सुनते थे - एक वाक्या बताता हु - " एक बार किसी कारण वश उनको भयानक गुस्सा आया, उन्होने सबसे बदमाश दोस्तो की टोली के बदमाश लडके को अनुशासनहीनता यानि शाम के पढाई के समय बदमाशी कर अन्य को परेशान करते वक्त दो थप्पड रशीद कर दिये ! बस अब क्या था, मारने के बाद वे उसे तुरंत मनाने लगे और उसने आव न देखा ताव झट से चेहरे पर कई मुक्का मार दिया, वे सह गये और अन्य बदमाशो से उसके गुस्से को शांत करने के तरीका और नुक्शे पुछने लगे ! वह तो बस बोला जा रहा था - तमतमाया हुआ !
सभी बदमाश लोग एक जगह इकठ्ठा हो उसे समझाने लगे कुछ शांत हुआ, तब तक वे भी आ गये और उन्होने रोते हुए, हाथ जोडकर कहे- " मुझे माफ कर दो, मै अभी स्कूल से जा रह हु, लेकिन तुम मन को शांत कर लो ! जब तक शांत नही होते मै मुझे हमेशा यह कचोटते रहेगा !"
बदमाशो ने एक साथ हुंकार भरा और बोला - " देख बे बहुत हि गया, अब नही माने तो हम सब एक साथ नही रहेगे, आज से बातचित बन्द, रहो अपने जिद्द मे ! वहा से सभी चले आये, लेकिन वे उसके साथ वही रहे, और एक ईट के आधा टुकडे को देकर बोले - लो मारो कस कर मै नही भागूगा", इतना सुनते ही वह हसने लगा और वहा से भाग कर हमलोंगो के पास आकर बोला - माफ कर दिये, नही तो आज रात को हम घर रहते परिवार के साथ !
इतना सुनते ही कहा गया - बडा अच्छा किये बे, गलती तो हमलोंगो का था, जुनियर लोंग भी देख रहा था, पढाकू लोंग चिढ रहे थे और शिकायत भी छुप कर कर रहे थे ! कई बार मना करने पर नही माने, की सर तो दोस्त है, सर थोडे है !
उसके बाद रात का खाना सभी बच्चो को वही परोसे, जिससे कुछ असामान्य न लगे !
फिर अचानक एक दिन पता चला की सर जी का कही से काल आया है की यहा आकर आप ज्वाईन कर सकते है. वे खुश थे अपनी कौशलता और हुनर सही मार्ग देने चल दिये !
आज अचानक उनकी याद दोपहर को खाने के वक़्त आया, सोचा और घटनाओ को जोडने मे सफल रहा ! उनकी टाफी के सन्दर्भ की किस्सा जो दिल को छुए है ! और बदमाशो की टोली की कई यादे !
शिक्षक दिवस अमर रहे !
सभी शिक्षक बने !
